हाथ खाली है तो शर्म मत कर, हाथ पर हाथ रख कर बैठ गया तो शर्म कर
जेब खाली होना हालात है।
हिम्मत खाली होना आदत है।
हालात बदलते हैं, आदत जिंदगी बना देती है।
👉 कई लोग हाथ खाली होने पर शर्मिंदा हो जाते हैं। सिर झुका लेते हैं।
👉 पर भाई हाथ खाली होना शर्म की बात नहीं है। हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाना शर्म की बात है।
पैसा कम होना गुनाह नहीं है। कोशिश कम होना गुनाह है।
1. हाथ खाली होना किस्मत हो सकती है, पर हाथ बांध कर बैठना फैसला है
सबके हालात एक जैसे नहीं होते भाई, ये सच है।
किसी को बाप दादा से सब मिल जाता है। किसी को खुद कमाना पड़ता है। किसी के पास नौकरी है, किसी के पास अभी नहीं है।
ये फर्क है। इसे मानना पड़ेगा।
पर इस फर्क को बहाना बना कर बैठ जाना ठीक नहीं।
👉 हाथ खाली है, मतलब अभी कम है। कल ज्यादा हो सकता है।
👉 हाथ पर हाथ रख कर बैठ गया, मतलब तूने खुद ही दरवाजा बंद कर लिया।
कई बार लोग बोलते हैं, "मेरे पास पैसा नहीं, मैं क्या करूं"।
भाई पैसा नहीं है तो हुनर सीख। हुनर नहीं है तो समय दे। समय नहीं है तो मेहनत कर।
कुछ न कुछ तो तेरे पास है। वही से शुरू होता है।
गाँव में कहते हैं, "खेत खाली पड़ा है तो शर्म नहीं, बीज होते हुए भी न बोया तो शर्म है"। तेरे पास बीज है भाई — तेरी हिम्मत, तेरा समय, तेरी मेहनत।
2. लोग क्या कहेंगे, इसी में कई लोग हाथ बांध लेते हैं
एक बड़ी वजह यही है भाई।
"छोटा काम करूंगा तो लोग क्या कहेंगे"।
"इतने कम पैसों में काम करूंगा तो इज्जत क्या रहेगी"।
"ठेला लगाऊंगा तो दोस्त क्या बोलेंगे"।
इसी सोच में कई लोग खाली हाथ बैठे रहते हैं।
👉 इज्जत काम से नहीं, कामचोरी से जाती है।
👉 छोटा काम करने से इज्जत कम नहीं होती। खाली बैठ कर दूसरों से मांगने से इज्जत कम होती है।
जो आदमी सुबह उठ कर कुछ भी काम करता है, पसीना बहाता है, वो इज्जतदार है भाई। चाहे वो चाय बेचे, चाहे मजदूरी करे, चाहे सिलाई करे।
जो हाथ पर हाथ रख कर बैठा है और दूसरों की कमाई पर नजर रखे है, उसकी इज्जत खुद भी नहीं करता। काम कोई छोटा बड़ा नहीं होता। सोच छोटी बड़ी होती है।
3. मेहनत करने वाला कभी खाली नहीं रहता
एक बात देखी है भाई।
जो आदमी मेहनत करता है, उसके हाथ कभी खाली नहीं रहते। आज पैसा कम हो सकता है, पर कल इज्जत ज्यादा होती है। अनुभव ज्यादा होता है। लोग भरोसा ज्यादा करते हैं।
और जो हाथ पर हाथ रख कर बैठा रहता है, उसके पास बहाने ज्यादा होते हैं।
👉 बहाना एक: किस्मत खराब है।
👉 बहाना दो: सरकार कुछ नहीं देती।
👉 बहाना तीन: मेरे पास तो कुछ है ही नहीं।
भाई किस्मत उन्हीं की बदलती है जो हाथ चलाते हैं। सरकार भी उसी की मदद करती है जो खुद कुछ करता है।
हाथ चलाएगा तो कुछ न कुछ आएगा। हाथ बांधेगा तो कुछ भी नहीं आएगा।
कई लोग बोलते हैं, "मौका नहीं मिल रहा"। मौका मिलता नहीं भाई, बनाना पड़ता है। एक दरवाजा खटखटाएगा नहीं तो खुलेगा कैसे?
4. हाथ खाली है तो क्या करे? 3 सीधी बातें
पहली बात: जो है उससे शुरू कर
बड़े पैसों का इंतजार मत कर। बड़ी नौकरी का इंतजार मत कर।
जो आता है उससे शुरू कर।
👉 लिखना आता है तो लिखना शुरू कर।
👉 बोलना आता है तो बोलना शुरू कर।
👉 बनाना आता है तो बनाना शुरू कर।
👉 कुछ नहीं आता तो सीखना शुरू कर।
शुरूआत छोटी होती है भाई। पर शुरूआत ही सब कुछ होती है।
दूसरी बात: शर्म को जगह मत दे
काम में शर्म कैसी?
सुबह उठ कर कमा रहा है तो शर्म किस बात की? पसीना बहा रहा है तो शर्म किस बात की?
शर्म तब कर जब तू पूरा दिन फोन पर दूसरों की जिंदगी देख कर अपनी जिंदगी खराब कर रहा है।
शर्म तब कर जब तू काम टाल रहा है।
काम करने वाला कभी छोटा नहीं होता। काम टालने वाला खुद को छोटा कर लेता है।
तीसरी बात: रोज कुछ कर, चाहे छोटा ही हो
एक दिन में जिंदगी नहीं बदलती भाई।
पर रोज थोड़ा थोड़ा करने से बदलती है।
👉 आज एक फोन लगा ले।
👉 आज एक हुनर सीख ले।
👉 आज एक जगह पूछ ले।
👉 आज एक घंटा ज्यादा काम कर ले।
रोज का एक कदम, साल में मीलों का फासला तय कर देता है। हाथ खाली है तो हाथ चला। हाथ चलेंगे तो हाथ भरेंगे।
देशी सोच का निचोड़
हाथ खाली होना हालात है भाई। इससे कोई छोटा बड़ा नहीं होता।
पर हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाना आदत बन जाती है। और आदत जिंदगी बन जाती है।
गाँव का देसी फंडा है, "नदी सूखी है तो शर्म नहीं, लोटा होते हुए भी पानी न भरे तो शर्म है"।
👉 तेरे पास लोटा है भाई। तेरी हिम्मत। तेरी मेहनत। तेरा समय।
👉 उसे भर। चला।
हाथ खाली है तो सिर मत झुका।
हाथ चला, किस्मत खुद झुकेगी।
काम छोटा नहीं होता।
खाली बैठना सबसे छोटा होता है।
शर्म पैसों की कमी में नहीं है भाई। शर्म कोशिश की कमी में है।