मौत तो आनी है, पर जीने का तरीका तू चुन
आना तय है, जाना तय है।
बीच का हिस्सा तेरे हाथ में है।
👉 मौत सबसे बड़ा सच है भाई, इससे कोई नहीं बच पाया।
👉 पर मौत से बड़ा सच ये है कि कई लोग जाने से पहले जीते ही नहीं।
अंत सबका एक ही होना है। फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि बीच का समय कैसे जिया।
1. मौत एक दिन आती है, पर कई लोग थोड़ा थोड़ा रोज मरते हैं
सच कड़वा है भाई, पर यही है।
कई लोग अपना मन रोज मारते हैं।
ये मत कर, लोग क्या कहेंगे।
ये तेरे बस का नहीं।
कल कर लेंगे।
इसी में साल निकल जाते हैं।
👉 सुबह उठे, काम किया, फोन चलाया, सो गए। फिर वही।
👉 पूछो पिछले साल क्या नया किया, जवाब नहीं है। क्योंकि कुछ नया किया ही नहीं।
ये जिंदगी नहीं, गिनती है। दिन गिन रहे हैं, जी नहीं रहे। मरना एक दिन में होता है, पर जीना रोज रोज होता है। जो रोज नहीं जिया, वो एक दिन पछताता है।
2. लोग क्या कहेंगे, इसी में आधी उम्र निकल जाती है
सबसे बड़ी जंजीर यही है भाई।
कई बार आदमी कपड़े भी लोगों की पसंद के पहनता है। काम भी लोगों की पसंद का चुनता है। सपना भी लोगों के डर से छोड़ देता है।
👉 लोग हँसेंगे।
👉 समाज क्या कहेगा।
👉 रिश्तेदार क्या सोचेंगे।
जिन लोगों के डर से तू अपना दिल मार रहा है, वो तेरे बुरे समय में साथ भी नहीं होंगे। और तेरे जाने के बाद दो दिन बात करेंगे, फिर अपनी जिंदगी में लग जाएंगे।
तो जी किसके लिए रहा है? उनके लिए जो भूल जाएंगे, या अपने लिए जो एक बार मिला है?
दुनिया का काम है बोलना। तेरा काम है जीना। हर आवाज का जवाब देने लगेगा तो अपनी आवाज सुनना बंद कर देगा।
3. कल पर मत टाल, कल का भरोसा नहीं है
"बाद में कर लूंगा" ये दो शब्द कई जिंदगियां खा गए हैं।
👉 घूमने जाऊंगा, बाद में।
👉 अपनों को समय दूंगा, बाद में।
👉 अपना काम शुरू करूंगा, बाद में।
👉 माफी मांग लूंगा, बाद में।
ये बाद में कभी आता ही नहीं भाई।
कई लोग सोचते हैं, जब सब ठीक होगा तब जीऊंगा। पर सब कभी ठीक नहीं होता। अधूरे सामान के साथ ही जीना पड़ता है।
पैसा जोड़ते जोड़ते कई लोग थक जाते हैं, "रिटायरमेंट में जीऊंगा"। पर तब घुटने साथ नहीं देते, मन थक जाता है।
जिंदगी किस्तों में नहीं जी जाती। आज जीनी पड़ती है।
4. पैसा जरूरी है, पर पैसा ही सब कुछ नहीं है
गलत मत समझना भाई। पैसा कमाना गलत नहीं है। पैसा चाहिए। रोटी, छत, इलाज सब पैसे से आता है।
पर पैसा ही जिंदगी बन जाए, ये ठीक नहीं।
कई बार लोग पैसों के पीछे इतना दौड़ते हैं कि जीना भूल जाते हैं।
बच्चे बड़े हो जाते हैं, पता नहीं चलता। माँ बाप बूढ़े हो जाते हैं, समय नहीं मिलता। खुद की तबीयत खराब हो जाती है, आराम नहीं मिलता।
फिर बैंक में पैसा पड़ा है, पर साथ बैठकर खाने वाला कोई नहीं।
👉 पैसा साधन है, मंजिल नहीं।
👉 पैसे से घर बनता है, घरवाले नहीं मिलते। पैसे से घड़ी मिलती है, समय नहीं मिलता।
कमा, खूब कमा। पर जीना मत भूल। हफ्ते में एक दिन ऐसा रख जब पैसों की बात ही मत कर। बस जी। अपनों के साथ। अपने लिए।
5. डर सबको लगता है, रुकना मत
"असफल हो गया तो?" ये सवाल सबके मन में आता है भाई।
डर आना गलत नहीं है। डर इंसान होने की निशानी है।
पर डर की वजह से रुक जाना गलत है।
कई लोग कोशिश ही नहीं करते क्योंकि हारने से डरते हैं। पर कोशिश नहीं की तो हार पहले से तय है।
👉 गिरेगा तो उठ जाएगा।
👉 लोग हँसेंगे तो दो दिन हँसेंगे, फिर भूल जाएंगे।
👉 पैसा डूबेगा तो फिर कमा लेगा।
पर जो समय गया, जो मौका गया, वो वापस नहीं आएगा।
डर को साथ रख, पर उसे मालिक मत बना। पीछे बैठा कर रख। तू चला।
6. तो जीना कैसे है? 3 सीधी बातें
पहली: अपने हिसाब से जी
लोगों के हिसाब से नहीं।
तुझे क्या पसंद है? क्या करना अच्छा लगता है? किसके साथ समय बिताना अच्छा लगता है? वही कर।
जिंदगी तेरी है। हिसाब भी तुझे ही देना है। तो फैसला भी तू ही ले।
दूसरी: अपनों को समय दे
पैसा, नाम, काम सब आता जाता रहेगा।
जो वापस नहीं आएंगे वो हैं लोग। माँ बाप। साथी। दोस्त।
रोज दस मिनट निकाल। बिना फोन के। बस बैठ। बात कर। सुन।
नाराज है किसी से? माफ कर दे। माफी मांग ले। अहंकार से रिश्ते बड़े नहीं होते।
तीसरी: आज जी
कल पर मत टाल।
जो सपना है आज एक छोटा कदम उठा ले।
जिससे प्यार है आज बोल दे।
जहां जाना है आज योजना बना ले।
बड़ा मत सोच। शुरू कर दे। शुरू करने वाले ही पहुंचते हैं। सोचने वाले वहीं खड़े रहते हैं।
देशी सोच का निचोड़
मौत अटल है भाई। ये बदलेगी नहीं।
पर मौत के डर से जीना छोड़ देना समझदारी नहीं है।
👉 गाँव का देसी फंडा है, मेहमान को आना ही है तो घर गंदा करके क्यों बैठे, सजा ले, जी ले, हँस ले।
मौत मेहमान है। आएगी। पक्का आएगी।
पर जब तक नहीं आई तब तक घर को सजा कर रख। दिल खोल कर जी।
मरना सबको है।
पर जीना सबको नहीं आता।
तू उनमें मत बन जो सिर्फ सांस लेते हैं।
तू उनमें बन जो यादें बनाते हैं।
मौत तो आनी है भाई। पर जीने का तरीका तू चुन। रोकर जीना है या हँसकर। डरकर जीना है या लड़कर। फैसला तेरा है, समय आज है।