एक भाग-दौड़ वाली सुबह के लिए है, दूसरी आराम वाली सुबह के लिए - दोनों का अपना टाइम है
भाई मेरे साथ भी यही हुआ था। शहर में आया तो सुबह-सुबह भाग-दौड़। 2 मिनट में Brush, कुल्ला, भागो। गांव जाता हूँ तो दादा अभी भी नीम की टहनी तोड़ के बैठा है, 15 मिनट तक आराम से दातुन।
मैंने सोचा - दोनों अपने-अपने हिसाब से सही हैं। एक को जल्दी है, दूसरे को सुकून चाहिए। तो आज दोनों की बात खुल के करते हैं, बिना किसी को गलत बोले।
अब जिंदगी Fast है भाई। सुबह 7 बजे उठना, 8 बजे निकलना। इतने में Fresh Breath चाहिए, मुंह साफ चाहिए। Toothpaste इसी जल्दी के लिए बनी। कई लोग मानते हैं कि इसमें Fluoride होता है जो दांतों को कीड़े से बचाने में मदद करता है, और Mint से मुंह तुरंत Fresh लगता है।
ये तो दादा-परदादा के टाइम से है। जब Tube नहीं थी, तब भी दांत चमकते थे। पारंपरिक रूप से माना जाता है कि नीम की कड़वाहट मुंह की सफाई में मदद करती है और इसकी चबाने की Process से मसूड़ों की कसरत होती है। खर्चा जीरो, मिलावट जीरो।
| Toothpaste 🪥 | नीम की दातुन 🌿 |
|---|---|
| Time: 2 Min में हो गया | Time: 10-15 Min आराम से |
| क्यों अच्छी लगती है: तुरंत Fresh, भाग-दौड़ में आसान | क्यों याद आती है: कड़वाहट के बाद मुंह एकदम साफ लगता है, ऐसा बुजुर्ग मानते हैं |
| खर्चा: महीने का 80-100 रु | खर्चा: पेड़ है तो 0 रु |
| ध्यान देने वाली बात: बहुत ज्यादा झाग वाली से कुछ लोगों को मुंह सूखा लग सकता है | ध्यान देने वाली बात: जोर से रगड़ने से मसूड़े छिल सकते हैं |
साल भर Toothpaste = 1200 रु के आसपास। दातुन = लगभग 0।
पर बात पैसे की नहीं भाई। शहर की 4th मंजिल पर नीम का पेड़ कहाँ से लाओगे रोज? और गांव में हर गली में मेडिकल नहीं कि Paste मिल जाए।
तो जीत-हार पैसे से नहीं, इस बात से है कि तेरी सुबह कैसी है - भाग-दौड़ वाली या आराम वाली।
जो लड़का रोज 7 बजे लोकल पकड़ता है, वो 15 मिनट दातुन नहीं कर सकता। उसे 2 मिनट में Fresh होना है, लोगों से बात करनी है। Toothpaste उसके लिए वरदान है। कई Dentist भी मानते हैं कि रात को सोने से पहले Paste से Brush करना जरूरी है, क्योंकि दिन भर का खाना दांतों में फंसा रहता है।
तो इसे बुरा बोलना गलत है। ये Time की जरूरत है।
दूसरी तरफ दादा को देखो। 80 साल, दांत अभी भी अपने। वो क्या करता है? रोज सुबह नीम की दातुन। धीरे-धीरे चबाता है। कई बुजुर्गों का मानना है कि इससे मसूड़ों में खून का दौरा बढ़ता है और मसूड़े मजबूत रहते हैं।
पर इसमें भी दिक्कत है - Fresh Breath Toothpaste जैसा तुरंत नहीं आता, और हर किसी को नीम की कड़वाहट पसंद नहीं। Office में दातुन करना थोड़ा अजीब भी लगता है।
मैं खुद क्या करता हूँ, वो बताता हूँ:
इससे क्या हुआ? Freshness भी मिल गई, दादी वाली आदत भी रह गई। लड़ाई खत्म।
आखिर में एक बात भाई - दांतों की मजबूती सिर्फ Paste या दातुन से नहीं आती। मीठा कम खाओ, पानी ज्यादा पियो, और रात को Brush करके सोओ। ये तीन चीजें दोनों से ज्यादा जरूरी हैं, ऐसा कई लोग मानते हैं।
ताऊ ने लिखे हैं "दांतों के दर्द के 5 पारंपरिक सुझाव" - लौंग, नमक-पानी जैसे किचन वाले तरीके जो दादी अपनाती थी।
👉 5 सुझाव पढ़ो⚠️ सूचना: ये सिर्फ पारंपरिक पारिवारिक जानकारी है। तेज दर्द, सूजन या लगातार खून आने पर खुद इलाज मत करो, तुरंत योग्य Dentist से मिलो।